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श्री राम चरित मानस के सिद्ध मंत्र-Shree Ram Charit Manas Ke Siddh Mantra


श्री राम चरित मानस के सिद्ध मंत्र-Shree Ram Charit Manas Ke Siddh Mantra


    मनः शान्ति मंत्र-

    राम राम कहि राम कहि। राम राम कहि राम।।

    विधि और सिद्ध-

    जिस आसन में आसानी से बैठ सकें, उसमें बैठ कर नेत्र बंद कर लें और प्रभु राम की ओर अपने मन को लगायें। यथा शक्ति इस मंत्र का पूरी श्रद्धा से जाप करें। 21 दिन तक लगातार प्रयोग करने से मन प्रभु राम में लीन हो जाता है और मन को शान्ति मिलती है। 


    मन की एकाग्रता के लिये-

    ताके जुग पद कमल मनावउ । जासु कृपा निरमल मति पावउ।।

    विधि और सिद्ध-

    इस मंत्र को रूद्राक्ष की माला पर प्रतिदिन दस माला 51 दिन तक जपें। इस मंत्र के प्रयोग से मन की शुद्धि होती है। इस मंत्र के प्रभाव से मन की एकाग्रता बनती है और बुद्धि निर्मल होती है।


    श्री राम कृपा प्राप्ति मंत्र - 1

    अरथ न धरम न काम रूचि, गति न चहउँ निरबान।

    जनम जनम रति राम पद, यह वरदानु न आन॥

    विधि और सिद्ध-

    भगवान राम की प्रतिमा के सामने ध्यान लगाकर अधिक से अधिक संख्या में इस मंत्र का जाप लगातार चालीस दिन तक करें। कम से कम दस माला तो अवश्य करें। इस मंत्र के जाप से जन्म-जन्मांतर तक साधक पर भगवान राम की कृपा बनी रहेगी। जन्म-जन्मांतर तक भगवान श्रीराम का स्मरण बना रहेगा और अन्त में विष्णु लोक की प्राप्ति होगी


    श्री राम कृपा प्राप्ति मंत्र - 2

    बंदउँ नाम राम रघुबर को, हेतु कृशानु भानु हिमकर को।

    विधि और सिद्ध-

    रविवार को इस मंत्र की सौ माला जपें। इस क्रिया को 40 दिन तक करें। इस प्रकार उपरोक्त मंत्र का निष्काम भाव से जाप करने पर भगवान राम की कृपा प्राप्त होती है।


    श्री राम कृपा प्राप्ति मंत्र- 3

    नाथ सकल सम्पदा तुम्हारी। मैं सेवकु समेत सुत नारी

    विधि और सिद्ध-

    नित्य प्रभु राम का पूजन करके इस मंत्र की एक माला जप करें। निष्काम भावना से जपने वाले साधक को प्रभु श्रीराम बिना मांगे सब कुछ प्रदान करते हैं।


    श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का मंत्र-

    प्रनवउँ पवन कुमार खल बन पावक ग्यानघना

    जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।

    विधि और सिद्ध-

    इस मंत्र का मंगलवार के दिन हनुमान जी की सिन्दूर चढ़ी प्रतिमा की पूजा करके लाल चन्दन की माला पर दस माला यानि 1080 बार जाप करें। 21 दिन तक लगातार इस मंत्र का जाप करें। जाप करने की शुरूआत मंगलवार से ही करें। इस मंत्र के प्रयोग से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


    सन्तान प्राप्ति के लिए मंत्र-

    दानि सिरोमनि कृपानिधि नाथ कहउँ सतिभाउ, चाहउँ तुम्हहि समान सुत प्रभु सन कवन दुराठ

    प्रेम मगन कौसल्या निस दिन जात न जान, सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।

    विधि और सिद्ध-

    इस मंत्र को पुत्रजीवी माला पर सोमवार से प्रारम्भ करके प्रतिदिन सौ माला करें, निश्चय ही गर्भ की स्थापना होगी।


    रोजगार पाने का मंत्र-

    बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई, गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।

    विधि और सिद्ध-

    इस मंत्र की दस माला प्रतिदिन जप करें। 40 दिन तक करने के बाद अनुष्ठान करें, इस मंत्र का प्रयोग रोजगार पाने के लिए किया जाता है।


    दरिद्रता नाशक मंत्र-

    अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद घन दारिद दवारि के।।

    विधि और सिद्ध-

    इस मंत्र को शुक्रवार को प्रारम्भ करके स्फटिक की माला पर प्रतिदिन दस माला का जाप करें। इस तरह चालीस दिन जाप करके मंत्र सिद्ध कर लें। 41वें दिन इस मंत्र का सम्पुट लगाकर अखण्ड पाठ करायें। ऐसा करने से दरिद्र दुख शीघ्र नष्ट होता है।


    रोग नाशक मंत्र – 1

    दैहिक दैविक भौतिक तापा । राम राज नहिं काहूहिं ब्यापा।।

    विधि और सिद्ध-

    किसी ग्रहण काल में इस मंत्र का निरन्तर जप कर अपने अनुकूल कर लें। जब भी आवश्यकता हो, एक कांसे की कटोरी में जल भर कर सात बार इस मंत्र को पढ़ कर जल में फूंक मारें और फिर वह जल रोगी को पिला दें। श्रीराम जी की कृपा से सभी रोगों का अन्त हो जाता है।


    रोग नाशक मंत्र - 2

    मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

    विधि और सिद्ध-

    यदि दवा आदि से भी रोग शांत ना हो तब शनिवार को सूर्यास्त के समय हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान जी को साष्ट्रांग प्रणाम करें और उनके शरणों में लगा सिंदूर घर लाकर ऊपर लिखे मंत्र से अभिमंत्रित करें। फिर अभिमंत्रित सिंदूर से रोगी के मस्तक पर तिलक लगा दें। रोगी की हालत में सुधार होने लगेगा।


    परिवार में प्रेम बढ़ाने का मंत्र-

    जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलइ न कछु सन्देहू

    विधि और सिद्ध-

    शुक्रवार के दिन स्फटिक की माला पर दस माला यारि 1080 मंत्र प्रतिदिन जपते हुए 51 दिन तक जप करें। तत्पश्चात् नित्य इस मंत्र की एक माला करें। इस मंत्र के जप से परिवार में एकता व प्रेम बढ़ता है।


    संकट नाशक मंत्र-

    दीन दयाल विखु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।

    विधि और सिद्ध-

    लाल चन्दन की माला पर इस चौपाई का सौ बार जाप करें। इस मंत्र का लगातार 21 दिन तक नित्य जाप करें। इससे विकट से विकट संकट भी भगवान श्रीराम की कृपा से समाप्त हो जाता है।


    प्रभु कृपा पाने का मंत्र-

    मूक होइ वाचाल पंगु चढ़ई गिरिवर गहन, जासु कृपा सो दयाल द्रवउ सकल कलिमल दहन

    विधि और सिद्ध-

    प्रभु श्रीराम की पूजा करके गुरुवार के दिन से प्रारम्भ करके कमलगट्टे की माला पर प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल एक माला अर्थात 108 बार इस मंत्र का जाप करें। 21 दिन निरन्तर करने पर प्रभु की कृपा प्राप्त होती है और दुर्भाग्य का अन्त होता है।


    माता पार्वती की कृपा प्राप्ति का मंत्र-

    जय जय निरिबरराज किशोरी। जय महेश मुख चंद चकोरी।

    विधि और सिद्ध-

    इस मंत्र को शारदीय नवरात्र में पार्वती देवी के समक्ष अखण्ड दीपदान करके प्रातःकाल पचास माला करें। इसके बाद प्रतिदिन मां का पूजन करके दस माला करें। नवमी वाले दिन सौ माला करके ध्यान मग्न हो जायें।


    हनुमान जी से कार्य करवाने का मंत्र-

    कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं

    विधि और सिद्ध-

    मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिन्दूर का चोला चढाकर इस मंत्र की सौ माला प्रतिदिन करें यानि 10800 बार 40 दिन तक करें। 40 दिन में यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा। नित्य कार्य से निवृत्त होकर हनुमान जी के सामने विनयपूर्वक अपना कार्य कहें। हनुमान जी उसे अवश्य पूरा करेंगे।

     

    विद्या प्राप्ति का मंत्र-

    गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई , अल्प काल विद्या सब आई।

    विधि और सिद्ध-

    कांसे की कटोरी में केसर की स्याही और अनार की कलम से इस मंत्र को लिख कर अपने पास रख लें। रूद्राक्ष की माला पर एक माला इस मंत्र का जाप करें। एक कटोरी में थोड़ा दूध मीठा मिलाकर विद्यार्थी को पिला दें। इस क्रिया को 21 दिन तक लगातार करें। हो सके तो 51 दिन तक करें।


    परीक्षा में उत्तीर्ण हेतु मंत्र-

    जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी, कबि उर अजिर नचावहिं बानी

    मोरि सुधरिहि सो सब भांति।जासु कृपा नहिं कृपां अघाती

     

    शत्रु को मित्र बनाने का मंत्र-

    नरल सुधा रिपु करहिं मिताई। लोपव सिंधु अनल सितलाई।

    विधि और सिद्ध-

    नवरात्र की प्रतिपदा से नवमी तक इस मंत्र की दस माला प्रतिदिन जपें । आवश्यकता पढ़ने पर इस मंत्र की एक माला जप कर गोरोचन को शक्तिकृत करके माथे पर टीका लगालें। फिर यदि आप शत्रु के समक्ष जाते है तो वह मित्रवत व्यवहार करता है। इस मंत्र का संपुट लगाकर रामायण का अखण्ड पाठ भी किया जाता है। यह कभी भी किसी भी दिन किया जा सकता है।


    यात्रा में सफलता का मंत्र-

    प्रबिसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कोसलपुर राजा।

    विधि और सिद्ध-

    सर्वप्रथम रूद्राक्ष की माला पर इस मंत्र को सौ बार जप कर सिद्ध कर लें।

    इसके बाद जब भी यात्रा पर जाना हो, थोड़ा सा जल सात बार मंत्र को पढ़ कर शक्तिकृत करके अपने आगे और ऊपर छिड़क लें। इस क्रिया को करके आप जिस उद्देश्य से जायेंगे, उसमें सफलता मिलेगी। किसी विशेष अवसर पर इस मंत्र का सम्पुट लगाकर अखण्ड रामायण का पाठ करने से तुरन्त लाभ मिलता है।


    मुकदमा जीतने का मंत्र - 1

    पवन तनय बल पवन समाना, बुधि बिबेक विध्यान निधाना।

    विधि और सिद्ध-

    इस मंत्र के जप को मंगलवार से प्रारम्भ करें। प्रतिदिन रूद्राक्ष की माला पर एक माला इस मंत्र की जप करें। इस अनुष्ठान को 51 दिनों तक करें। साथ ही हनुमान जी की पूजा करें तथा वानरों को भीगा हुआ चना गुड़ मिलाकर खिलायें। इस प्रकार जप करने से हनुमान जी की कृपा से मुकदमे में अनुकुलता प्राप्त होती है।

    अथवा-

    प्रतिदिन गाय को गेहूं व गुड़ खिलायें और सुन्दरकाण्ड का पाठ करें


    मुकदमा जीतने का मंत्र - 2

    विधि और सिद्ध-

    मुकदमा जीतने के लिये मंगलवार के दिन हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा के समीप श्री हनुमान यंत्र को स्थापित कर उसके सामने बजरंग बाण के 51 पाठ करें। कार्य सिद्ध होने पर हनुमान जी चोला चढ़ाकर लड्डुओं का भोग लगायें।


    कन्या विवाह के लिये मंत्र-

    कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि, नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः।

    विधि और सिद्ध

    प्रतिदिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात् मां कात्यायनि का चित्र अथवा मां पार्वती का चित्र अपने सामने रखकर भाव से मां की पूजा करते हुए लाल पुष्प, अक्षत, सिन्दूर, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें। फिर उनके समक्ष दीपक जलाकर इस मंत्र की एक माला अर्थात 108 बार जाप करें। इस अनुष्ठान को तब तक करें जब तक आपकी मनोकामना पूर्ण न हो जायें। यह अनुष्ठान कुआंरी कन्यायें वर की प्राप्ति के लिये करती हैं। जिन कन्याओं को विवाह न हो रहा हो, उन्हें इस अनुष्ठान को करना चाहिए।


    विपत्ति नाशक सुखकारक मंत्र-

    राजीव नयन धरें धनु सायक, भगत बिपति भंजन सुखदायक॥

    विधि और सिद्ध-

    रूद्राक्ष की माला पर शनिवार को प्रारम्भ करके पांच माला प्रतिदिन चालीस दिन तक जप करें। इस मंत्र के प्रयोग से समसत विपत्तियों का नाश होता है और सुख की प्राप्ति होती है।

    महामंत्र-

    हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे

    हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे


    अन्य मंत्र-

    पुत्र प्राप्ति हेतु मंत्र-

    देवकी सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।


    पति प्राप्ति हेतु मंत्र-

    कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि, नन्द गोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः।

    विद्या प्राप्ति मंत्र-

    ॐ नमो हयग्रीवाय महां मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा।


    कष्ट निवारण मंत्र-

    कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणत कलेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।


    काल सर्प दोष / स्वप्न में सर्प दिखने से मुक्ति हेतु मंत्र-

    नवनागस्तुति:-

    अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् । शङ्खपालं धार्तराष्ट्र तक्षकं कालियं तथा ।। 1 ।। 

    एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् । सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः ।। 2 ।।

    विषाद्भयं तस्य नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ।।


    विनम्र आग्रह - अगर आप मेरे द्वारा साझा की गयी जानकारी से संतुष्ट है तो ब्लॉग पोस्ट पर कमेंट जरूर लिखें  धन्यवाद !😊


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